नाग पूजा कितने लाभदायक

       
      👉🌺🐉नाग पूजा कितने लाभदायक है🐉🌺👈


 



👉🐉नाग पूजा🐉👈

नाग पंचमी  भी ऐसा ही एक पर्व है जिसमें सांप या नाग को देवता  मानकर उसकी पूजा की जाती है. नाग पंचमी के दिन लोग दिन भर व्रत करते हैं और सांपों को दूध भी पिलाते हैं. नाग पंचमी के व्रत को अत्‍यंत फलदायी और शुभ माना गया है.


नाग पंचमी का त्योहार नागों को समर्पित है। यह हर वर्ष श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। देशभर में आज नाग पंचमी मनाई जा रही है। इस दिन व्रत पूर्वक नागों का पूजन-अर्चन होता है। इस बार नाग पंचमी सावन के सोमवार को पड़ रही है, इसलिए इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। नाग पंचमी का पर्व नागों के साथ जीवों के प्रति सम्मान, उनके संवर्धन एवं संरक्षण की प्रेरणा देता है।





नाग पंचमी हिन्दुओं का एक महत्वपूर्ण त्यौहार है। हिन्दू पंचांग में सावन माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी को नाग पंचमी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन नाग देवता या सर्प की पूजा की जाती है और उन्हें दूध पिलाया जाता है। नागपंचमी के ही दिन अनेक गांव व कस्बों में कुश्ती का आयोजन होता है, जिसमें आसपास के पहलवान भाग लेते हैं। गाय, बैल आदि पशुओं को इस दिन नदी, तालाब में ले जाकर नहलाया जाता है।

👉देवों की सेवा में समर्पित हैं 🐉नाग👈
पुराणों में यक्ष, किन्नर और गन्धर्वों के वर्णन के साथ-साथ नागों का भी वर्णन मिलता है। भगवान विष्णु की शय्या की शोभा नागराज शेष बढ़ाते हैं। भगवान शिव के अलंकरण में वासुकी की महत्वपूर्ण भूमिका है। योगसिद्धि के लिए जो कुण्डलिनी शक्ति जागृत की जाती है, उसको सर्पिणी कहा जाता है। पुराणों में भगवान सूर्य के रथ में द्वादश नागों का उल्लेख मिलता है, जो क्रमश: प्रत्येक मास में उनके रथ के वाहक बनते हैं। इस प्रकार अन्य देवताओं ने भी नागों को धारण किया है।

👉🐉नाग देवता हैं पूज्य👈
नाग देवता भारतीय संस्कृति में देवरूप में स्वीकार किये गये हैं। कश्मीर के जाने-माने संस्कृत कवि कल्हण ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक 'राजतरंगिणी' में कश्मीर की सम्पूर्ण भूमि को नागों का अवदान माना है। वहाँ के प्रसिद्ध नगर अनन्तनाग का नामकरण इसका ऐतिहासिक प्रमाण है। देश के पर्वतीय प्रदेशों में नागपूजा बहुतायत से होती है। यहाँ नागदेवता अत्यन्त पूज्य माने जाते हैं। हमारे देश के प्रत्येक ग्राम- नगर में ग्राम देवता और लोक देवता के रूप में नाग देवताओं के पूजास्थल हैं। भारतीय संस्कृति में सायं-प्रात: भगवत्स्मरण के साथ अनन्त तथा वासुकि आदि पवित्र नागों का नामस्मरण भी किया जाता है, जिनमें नागविष और भय से रक्षा होती है तथा सर्वत्र विजय होती है-


👉🐉नाग पूजा का महत्व👈

कहा जाता है कि एक बार मातृ-शाप से नागलोक जलने लगा। इस दाहपीड़ा की निवृत्ति के लिए नाग पंचमी को गाय के दूध से स्नान कराया गया। दुग्ध स्नान नागों को शीतलता प्रदान करता है, वहीं भक्तों को सर्पभय से मुक्ति भी देता है।

👉🐉नाग पंचमी की मुख्य कथा👈



एक समय की बात है, कालिया नाग का निवास यमुना नदी में होने के कारण उस नदी का पानी काले रंग का होने लगा था। कहा जाता है कि एक समय उस भयानक विषधर कालिया नाग के विष के कारण यमुना नदी विषाक्त हो चली थी। जब कालिया नाग के इस कृत्य की जानकारी भगवान श्री कृष्ण तक पहुंची तब उन्होंने कालिया नाग के साथ युद्ध करते हुए उसे यमुना छोड़ने पर विवश कर दिया और पाताल लोक भेज दिया।




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